narendra kohli

नरेन्द्र कोहली : हिन्दी साहित्य में पौराणिक, ऐतिहासिक एवं मिथकीय रचनाओं के आधुनिक रचनाकार

हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार नरेंद्र कोहली अब हमारे बीच नहीं रहे। वे कोरोना संक्रमित थे और पिछले कुछ समय से अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन से हिन्दी साहित्य …

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राजा निरबंसिया — कमलेश्वर

“एक राजा निरबंसिया थे,” मां कहानी सुनाया करती थीं। उनके आसपास ही चार-पांच बच्चे अपनी मुठ्ठियों में फूल दबाए कहानी समाप्त होने पर गौरों पर चढाने के लिए उत्सुक-से बैठ …

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अष्टावक्र का विवाह — रांगेय राघव

एक बार महर्षि, अष्टावक्र महर्षि वदान्य की कन्या के रूप पर मोहित हो गये। उन्होंने उसके पिता के पास जाकर उस कन्या के साथ विवाह करने की इच्छा प्रकट की। …

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दोपहर का भोजन — अमरकांत

सिद्धेश्वरी ने खाना बनाने के बाद चूल्हे को बुझा दिया और दोनों घुटनों के बीच सिर रखकर शायद पैर की उँगलियाँ या जमीन पर चलते चीटें-चीटियों को देखने लगी। अचानक …

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दारोगा अमीचन्द — अज्ञेय

यों तो जिस जेल की यह बात है उसका नाम मैं बता देता, पर मुश्किल यह है कि उसके साथ फिर दारोगा का नाम भी बताना पड़ेगा या आप खुद …

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सवा सेर गेहूँ — मुंशी प्रेमचंद

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा गरीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी के देने में। छक्का-पंजा न जानता …

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गुनाहों का देवता- धर्मवीर भारती

भाग – 1 इस उपन्यास के नये संस्करण पर दो शब्द लिखते समय मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या लिखूँ? अधिक-से-अधिक मैं अपनी हार्दिक कृतज्ञता उन सभी पाठकों …

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बड़े भाई साहब — मुंशी प्रेमचंद्र की सम्पूर्ण कहानियाँ

मेरे भाई साहब मुझसे पॉँच साल बडे थे; लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्‍होने भी उसी उम्र में पढना शुरू किया था जब मैने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्‍व …

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स्त्री सुबोधिनी — मन्नू भंडारी

प्यारी बहनो, न तो मैं कोई विचारक हूँ, न प्रचारक, न लेखक, न शिक्षक। मैं तो एक बड़ी मामूली-सी नौकरीपेशा घरेलू औरत हूँ, जो अपनी उम्र के बयालीस साल पार …

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काबुलीवाला — रवींद्रनाथ टैगोर

मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष …

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पंचलाईट/पंचलैट (ठुमरी)— फणीश्वरनाथ रेणु

पिछले पन्द्रह दिनों से दंड-जुरमाने के पैसे जमा करके महतो टोली के पंचों ने पेट्रोमेक्स खरीदा है इस बार, रामनवमी के मेले में। गाँव में सब मिलाकर आठ पंचायतें हैं। …

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विश्व हिंदी दिवस

आज विश्व हिंदी दिवस है। विश्व हिंदी दिवस वर्ष 10 जनवरी 1975 में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन (नागपुर) की वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जनवरी को …

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इक बार फिर से माँ..

मेरी बचपन की सब यादों कोदोबारा से नया कर दे माँ, इक बार फिर से माँ…मुझे हैे याद जब भी मैंकभी बेचैन होती थी, मुझे आगोश में लेकरतू सीने से …

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मॉब लिंचिंग में मारी गयी पहली औरत

वो तो बस यू ही खड़ी थीवो न हिन्दू थी न मुसलमानऔर न ही किसी और समाज सेवो तो बस एक औरत थीजो खड़ी थीवो न तो कुछ चुरा कर …

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बस यूँ ही…

आज एक अजीब दौर से हम सब गुजर रहे है। खासकर सोशल मीडिया की दुनिआ में। क्या बुद्धिजीवी, क्या करिया अक्षर भैंस बराबर वाले – सभी अपनी मानसिकता दूसरों पर …

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बेरंग होता त्योहारों का देश

होली आने में कुछ दिन शेष रह गए है, बमुश्किल दो-तीन दिन। पर न तो कही देशी फ़ाग सुनने को मिल रहा है और न ही होली के गीत। हाँ …

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लाश — कमलेश्वर

सारा शहर सजा हुआ था। खास-खास सडकों पर जगह-जगह फाटक बनाए गए थे। बिजली के खम्भों पर झंडे, दीवारों पर पोस्टर। वालण्टियर कई दिनों से शहर में पर्चे बाँट रहे …

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दिल्ली में एक मौत — कमलेश्वर

मैं चुपचाप खडा सब देख रहा हूँ और अब न जाने क्यों मुझे मन में लग रहा है कि दीवानचंद की शवयात्रा में कम से कम मुझे तो शामिल हो …

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गर्मियों के दिन — कमलेश्वर

चुंगी-दफ्तर खूब रँगा-चुँगा है। उसके फाटक पर इंद्रधनुषी आकार के बोर्ड लगे हुए हैं। सैयदअली पेंटर ने बड़े सधे हाथ से उन बोर्ड़ों को बनाया है। देखते-देखते शहर में बहुत-सी …

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